Saturday, 31 October 2015

'गुड्डू की गन' टाइटल से ही आप समझ सकते हैं कि फिल्म में क्या है




'गुड्डू की गन' टाइटल से ही आप समझ सकते हैं कि फिल्म में क्या है। अफसोस इस बात का है कि फिल्म देखकर आप खुद को ठगा महसूस करेंगे। पिछले कुछ अर्से से बॉक्स ऑफिस पर कुछ हॉट, डबल मीनिंग, सेक्सी फिल्मों ने औसत से ज्यादा बिजनस कर दिखाया। कुछ अर्सा पहले आई सेक्स कॉमिडी फिल्म हंटर और इसी मूवी के लीड किरदार में काफी समानताएं हैं। हालांकि ये किरदार दर्शकों की उस क्लास को भी प्रभावित नहीं कर पाते, जिसे इन फिल्मों का शौकीन माना जाता है। गुड्डू की गन देखने के बाद मानना होगा कि अगर कहानी, स्क्रिप्ट में दम न हो और सिर्फ सेक्स परोसने के नाम पर हॉट फिल्म बनाई जाए तो भी बॉक्स आफिस पर ऐसी फिल्म के टिकने के आसार कम हैं।

कहानी: कोलकाता में घर-घर जाकर वॉशिंग पाउडर बेचने वाला सेल्समैन गुड्डू (कुणाल खेमू) अपने दोस्त लड्डू (सुमित व्यास) के साथ रहता है। गुड्डू कुछ ज्यादा ही रंगीनमिजाज टाइप का है। शादीशुदा महिलाओं के साथ मौज-मस्ती करना और रिश्ते बनाना उसकी आदत में शामिल है। दरअसल 'गुड्डू की गन' यानी उसका गुप्तांग कहीं ज्यादा पॉवरफुल है। जिस महिला के साथ गुड्डू का रिश्ता बनता है, वह उसके लिए कुछ भी करने को तैयार रहती है। गुड्डू अब खुद को ऐसा इंसान समझता है जिसके लिए महिलाएं अपना सब कुछ न्यौछावर करने को तैयार बैठी हैं। इसी बीच गुड्डू एक सुंदर लड़की भोली (अपर्णा शर्मा) के साथ रिश्ता बनाकर छोड़ देता है। भोली के दादाजी को कई तांत्रिक शक्तियां भी प्राप्त हैं। दादाजी गुड्डू को ऐसा शाप देते हैं कि उसका गुप्तांग गोल्ड का हो जाता है। इसके बाद अचानक गुड्डू की डिमांड बढ़ जाती है। माफिया के लोग गुड्डू की गोल्डन गन को हासिल करने की दौड़ में लग जाते हैं। आखिर गुड्डू दादाजी से मिलता है, जो उसे बताते हैं कि जिस दिन उसे सच्चा प्यार मिलेगा, सब ठीक हो जाएगा। अचानक गुड्डू की मुलाकात काली (पायल सरकार) से होती है। पायल के सामने आते ही गुड्डू ठीक हो जाता है, लेकिन उसके जाते ही फिर वैसा।

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