-निर्माताः अश्विनी यर्दी
-निर्देशकः प्रभुदेवा
-सितारेः अक्षय कुमार, एमी जैक्सन, केके मेनन, लारा दत्ता, योगराज सिंह, रति अग्निहोत्री
-निर्देशकः प्रभुदेवा
-सितारेः अक्षय कुमार, एमी जैक्सन, केके मेनन, लारा दत्ता, योगराज सिंह, रति अग्निहोत्री
रेटिंग *1/2
आलसी, नाकाबिक और निकम्मे बेटों को काबिल, समझदार और पैरों पर खड़ा करने के लिए शादी का फार्मूला सदियों से भारतीय समाज में इस्तेमाल किया जाता रहा है। यह मान कर चला जाता है कि शादी हो जाएगी तो बेटा समझदार/जिम्मेदार बन जाएगा।
रफ्तार सिंह (अक्षय कुमार) का पिता (योगराज सिंह) बेटे को पैरों पर खड़ा करने के लिए उसके सामने विकल्प रखता है कि या तो उनके दोस्त के पास गोवा जाकर काम-धाम करे या फिर गांव की मोटी लड़की स्वीटी के साथ शादी कर ले। रफ्तार का कहना है कि कि स्वीटी कुश्ती लड़ने की चीज है, शादी करने की नहीं।
आपको आश्चर्य होगा कि फिल्म की रिलीज से पहले अक्षय और उनकी टीम जोर-शोर से प्रचार कर रही थी कि सिंह इज ब्लिंग लोगों को महिलाओं का सम्मान करना और महिलाओं को सशक्त बनाने के पाठ पढ़ाएगी!
निर्देशक प्रभुदेवा की यह फिल्म पूरी तरह से अक्षय और उनकी कॉमिक टाइमिंग पर निर्भर है। सरदार के रूप में गंवई बने अक्षय ने अपनी तरफ से पूरी कोशिश भी की है कि लोग हंसें। लेकिन कई जगहों पर उनकी बातें हंसाने से ज्यादा हास्यास्पद मालूम पड़ती हैं।
लारा दत्ता अपनी कमबैक फिल्म में कमर से नीचे की कॉमेडी बातों के लिए क्यों राजी हुईं यह वही बता सकती हैं। केके मेनन बार बार खुद को ‘टू गुड’ कहते हैं, मगर यह सच नहीं है। ऐमी जैक्सन सिर्फ अपने सौंदर्य के लिए हैं।
प्रभु देवा पर्दे पर केवल लघुशंका निवारण के लिए दिखते हैं... सोचिए इसमें कॉमेडी क्या है!! ऐक्शन जैक्सन के बाद प्रभु देवा ने निर्देशक के रूप में एक और खराब फिल्म दी है। कहानी के नाम पर यहां ऐसा कुछ है भी नहीं, जिसके बारे में कहा जाए कि यह नया है। गंवई हीरो। तेज-तर्रार गोरी मेम हीरोइन।
दोनों एक-दूसरे की भाषा नहीं समझते। ऐसे में एमिली (लारा दत्ता) की एंट्री होती है जो दोनों के बीच अनुवादक का काम करती है। इन सबके बीच एक विलेन (केके मेनन), जो हीरोइन के हाथों अपमानित होने के बावजूद उस पर फिदा है। मगर अपमान का बदला लेना चाहता है।
अगर आपने थोड़ी भी बॉलीवुड फिल्में देखी हैं तो आसानी से इस प्लॉट को पूरे सिनेमा में तब्दील कर सकते हैं। रफ्तार सिंह के रोमानिया जाते ही आपको अक्षय की सिंह इज किंग याद आती है और आप पाते हैं कि यह फिल्म काफी हद तक उससे प्रभावित है।
फिल्म में पंजाब के साथ गोवा और रोमानिया के लोकेशन हैं, जिन्हें खूबसूरती से शूट किया गया है। सिंह इज ब्लिंग में सिर्फ उन्हीं दर्शकों को कुछ चमक दिख सकती है जो अक्षय की फिल्मों पर आंख मूंद कर भरोसा करते हैं।
पचास के करीब पहुंच रहे अक्षय की रफ्तार जरूर चकित और प्रभावित करती है। फिल्म तब भी देखी जा सकती है जब आप दिमाग के सारे बटन बंद रखें। अगर आप थोड़ा भी सचेत होकर फिल्म देखेंगे तो फ्यूज उड़ जाएगा और दिमाग की बत्ती गुल हो जाएगी।
आलसी, नाकाबिक और निकम्मे बेटों को काबिल, समझदार और पैरों पर खड़ा करने के लिए शादी का फार्मूला सदियों से भारतीय समाज में इस्तेमाल किया जाता रहा है। यह मान कर चला जाता है कि शादी हो जाएगी तो बेटा समझदार/जिम्मेदार बन जाएगा।
रफ्तार सिंह (अक्षय कुमार) का पिता (योगराज सिंह) बेटे को पैरों पर खड़ा करने के लिए उसके सामने विकल्प रखता है कि या तो उनके दोस्त के पास गोवा जाकर काम-धाम करे या फिर गांव की मोटी लड़की स्वीटी के साथ शादी कर ले। रफ्तार का कहना है कि कि स्वीटी कुश्ती लड़ने की चीज है, शादी करने की नहीं।
आपको आश्चर्य होगा कि फिल्म की रिलीज से पहले अक्षय और उनकी टीम जोर-शोर से प्रचार कर रही थी कि सिंह इज ब्लिंग लोगों को महिलाओं का सम्मान करना और महिलाओं को सशक्त बनाने के पाठ पढ़ाएगी!
निर्देशक प्रभुदेवा की यह फिल्म पूरी तरह से अक्षय और उनकी कॉमिक टाइमिंग पर निर्भर है। सरदार के रूप में गंवई बने अक्षय ने अपनी तरफ से पूरी कोशिश भी की है कि लोग हंसें। लेकिन कई जगहों पर उनकी बातें हंसाने से ज्यादा हास्यास्पद मालूम पड़ती हैं।
लारा दत्ता अपनी कमबैक फिल्म में कमर से नीचे की कॉमेडी बातों के लिए क्यों राजी हुईं यह वही बता सकती हैं। केके मेनन बार बार खुद को ‘टू गुड’ कहते हैं, मगर यह सच नहीं है। ऐमी जैक्सन सिर्फ अपने सौंदर्य के लिए हैं।
प्रभु देवा पर्दे पर केवल लघुशंका निवारण के लिए दिखते हैं... सोचिए इसमें कॉमेडी क्या है!! ऐक्शन जैक्सन के बाद प्रभु देवा ने निर्देशक के रूप में एक और खराब फिल्म दी है। कहानी के नाम पर यहां ऐसा कुछ है भी नहीं, जिसके बारे में कहा जाए कि यह नया है। गंवई हीरो। तेज-तर्रार गोरी मेम हीरोइन।
दोनों एक-दूसरे की भाषा नहीं समझते। ऐसे में एमिली (लारा दत्ता) की एंट्री होती है जो दोनों के बीच अनुवादक का काम करती है। इन सबके बीच एक विलेन (केके मेनन), जो हीरोइन के हाथों अपमानित होने के बावजूद उस पर फिदा है। मगर अपमान का बदला लेना चाहता है।
अगर आपने थोड़ी भी बॉलीवुड फिल्में देखी हैं तो आसानी से इस प्लॉट को पूरे सिनेमा में तब्दील कर सकते हैं। रफ्तार सिंह के रोमानिया जाते ही आपको अक्षय की सिंह इज किंग याद आती है और आप पाते हैं कि यह फिल्म काफी हद तक उससे प्रभावित है।
फिल्म में पंजाब के साथ गोवा और रोमानिया के लोकेशन हैं, जिन्हें खूबसूरती से शूट किया गया है। सिंह इज ब्लिंग में सिर्फ उन्हीं दर्शकों को कुछ चमक दिख सकती है जो अक्षय की फिल्मों पर आंख मूंद कर भरोसा करते हैं।
पचास के करीब पहुंच रहे अक्षय की रफ्तार जरूर चकित और प्रभावित करती है। फिल्म तब भी देखी जा सकती है जब आप दिमाग के सारे बटन बंद रखें। अगर आप थोड़ा भी सचेत होकर फिल्म देखेंगे तो फ्यूज उड़ जाएगा और दिमाग की बत्ती गुल हो जाएगी।

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