नई दिल्ली। बड़े पर्दे का गोल्डन कपल एक बार फिर दर्शकों को अपनी कैमिस्ट्री का दीवाना बनाने के लिए तैयार है। हम बात कर रहे हैं रणबीर कपूर और दीपिका पादुकोण की। दोनों की फिल्म 'तमाशा' 27 नवंबर को रिलीज होने जा रही है, लेकिन रणबीर और दीपिका ने फिल्म के रिलीज होने से पहले ही उसके प्लॉट और अपने किरदारों की कहानी का खुलासा कर दिया है।
रणबीर ने कहा कि निर्देशक इम्तियाज अली ने 'तमाशा' का संदर्भ राधा कृष्ण की अमर प्रेम कहानी से लिया है। फिल्म में रणबीर वेद की भूमिका निभा रहे हैं, जबकि दीपिका तारा के किरदार में हैं। वेद परिवार और स्वयं के स्थापित मानकों को पूरा करने के चक्कर में खुद को खे देता है। इसके बाद तारा वेद की जिंदगी में आती है और उसे उसकी क्षमताओं का अहसास दिलाने में मदद करती है।
रणबीर ने कहा, 'तारा अपने मूल्यों में विश्वास करने वाली एक भारतीय नारी है, लेकिन उसकी विचारधारा आधुनिक है। यहां इम्तियाज राधा कृष्ण के वक्त में जाते हैं। राधा ने खुद का त्याग इसलिए कर दिया क्योंकि वह कृष्ण की क्षमताओं को जानती थीं और उन्होंने उनसे कहा था कि आप जाइए, जो हैं वह बनिए, मैं आपके लिए अपने प्यार का त्याग करूंगी। मुझे लगता है कि वास्तव में इम्तियाज इससे प्रेरित हुआ और तारा का किरदार भी उसी पर आधारित है।\'
दीपिका ने बताया कि तारा और वेद के किरदार से कोई भी खुद को आसानी से जोड़ सकता है और यह आज के समय में प्रासंगिक है, जहां रिश्ते एकदम मशीनी बन चुके हैं। दीपिका ने कहा, \'तमाशा वेद की कहानी है। उस पर परिवार का और खुद उसका बहुत दबाव है और इस प्रक्रिया में वह खुद को खोने लगता है और कुछ ऐसा बनने लगता है, जो वह दरअसल नहीं है। यहां उसे अपने जीवन में एक तारा की जरूरत है, जो उसे इस स्थिति से निकाले और उसकी हकीकत से रूबरू करवाए। मुझे लगता है कि लोग वेद और तारा से ख्खुद को जोड़कर देखेंगे।
रणबीर ने कहा कि निर्देशक इम्तियाज अली ने 'तमाशा' का संदर्भ राधा कृष्ण की अमर प्रेम कहानी से लिया है। फिल्म में रणबीर वेद की भूमिका निभा रहे हैं, जबकि दीपिका तारा के किरदार में हैं। वेद परिवार और स्वयं के स्थापित मानकों को पूरा करने के चक्कर में खुद को खे देता है। इसके बाद तारा वेद की जिंदगी में आती है और उसे उसकी क्षमताओं का अहसास दिलाने में मदद करती है।
रणबीर ने कहा, 'तारा अपने मूल्यों में विश्वास करने वाली एक भारतीय नारी है, लेकिन उसकी विचारधारा आधुनिक है। यहां इम्तियाज राधा कृष्ण के वक्त में जाते हैं। राधा ने खुद का त्याग इसलिए कर दिया क्योंकि वह कृष्ण की क्षमताओं को जानती थीं और उन्होंने उनसे कहा था कि आप जाइए, जो हैं वह बनिए, मैं आपके लिए अपने प्यार का त्याग करूंगी। मुझे लगता है कि वास्तव में इम्तियाज इससे प्रेरित हुआ और तारा का किरदार भी उसी पर आधारित है।\'
दीपिका ने बताया कि तारा और वेद के किरदार से कोई भी खुद को आसानी से जोड़ सकता है और यह आज के समय में प्रासंगिक है, जहां रिश्ते एकदम मशीनी बन चुके हैं। दीपिका ने कहा, \'तमाशा वेद की कहानी है। उस पर परिवार का और खुद उसका बहुत दबाव है और इस प्रक्रिया में वह खुद को खोने लगता है और कुछ ऐसा बनने लगता है, जो वह दरअसल नहीं है। यहां उसे अपने जीवन में एक तारा की जरूरत है, जो उसे इस स्थिति से निकाले और उसकी हकीकत से रूबरू करवाए। मुझे लगता है कि लोग वेद और तारा से ख्खुद को जोड़कर देखेंगे।

No comments:
Post a Comment